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बुधवार, 30 सितंबर 2026

​महालया अमावस्या पर भूलकर भी ये 3 काम न करें! वरना रुष्ट हो सकते हैं पितृ

महालया अमावस्या, यानी सर्वपितृ अमावस्या का दिन सनातन धर्म में बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण माना गया है। यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है, जब हमारे पूर्वज अपनी यात्रा पूरी करके वापस अपने लोक लौटते हैं। माना जाता है कि इस दिन हमारे पितृ घर के द्वार पर आकर अपने वंशजों से श्रद्धा और तर्पण की उम्मीद रखते हैं।

​लेकिन अनजाने में हम अक्सर कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे पितृ प्रसन्न होने के बजाय रुष्ट होकर लौट जाते हैं। जब घर में पितृ दोष लगता है, तो बिना वजह घर में क्लेश, काम-धंधे में रुकावट, पैसों की तंगी या परिवार में किसी न किसी की बीमारी बनी रहती है।

​आज हम आपको उन 3 कामों के बारे में बता रहे हैं, जो आपको महालया अमावस्या के दिन भूलकर भी नहीं करने चाहिए।

​1. घर आए किसी भी जीव या व्यक्ति का अनादर न करें

​महालया अमावस्या के दिन आपके घर के मुख्य द्वार पर कोई भी आए—चाहे वह कोई गरीब हो, साधु-संत हों, कुत्ता, गाय या कौआ ही क्यों न हो—उसे खाली हाथ या भूखा कभी न लौटाएं। शास्त्रों में लिखा है कि इस दिन पितृ किसी भी रूप में आपके पास आ सकते हैं।

​यदि इस दिन आप किसी जरूरतमंद का अपमान करते हैं या किसी जानवर को मार कर भगाते हैं, तो यह पितरों का सीधा अनादर माना जाता है। इसलिए इस दिन द्वार पर आए हर जीव को अन्न या जल जरूर दें।

​2. तामसिक भोजन और नशे से पूरी तरह दूर रहें

​अमावस्या का दिन मन और घर की ऊर्जा को बहुत गहराई से प्रभावित करता है। इस दिन घर में मांस-मदिरा, अंडा, प्याज और लहसुन जैसा तामसिक भोजन बिल्कुल न बनाएं और न ही इसका सेवन करें।

​घर के अंदर का वातावरण इस दिन पूरी तरह सात्विक और शांत होना चाहिए। जिस घर में महालया अमावस्या के दिन कलेश होता है या नशा किया जाता है, वहां से पितृ देव भारी मन से लौट जाते हैं और घर की सुख-शांति धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है।

​3. बाल-नाखून काटना और संध्याकाल में सोना

​महालया अमावस्या के दिन शरीर की सफाई से जुड़े कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है। इस दिन बाल काटना, शेविंग करना या नाखून काटना पूरी तरह वर्जित माना गया है।

​इसके अलावा, सूर्यास्त के समय यानी शाम के वक्त सोने से बचें। संध्या का समय पितरों के ध्यान और धूप-दीप जलाने का होता है। इस समय घर के मुख्य द्वार पर घी का एक दीपक जलाएं और शांति से पितरों का स्मरण करें।

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​अगर आपको लगता है कि सब कुछ सही करने के बाद भी आपके बनते काम बिगड़ जाते हैं, घर में अकारण बीमारियां या पैसों की तंगी रहती है, तो यह पितृ दोष या वास्तु असंतुलन का संकेत हो सकता है। कमलेश जी के बताए अचूक और सरल उपायों से कई परिवारों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति वापस लौटी है।

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​कमेंट में जरूर लिखें और अपना सवाल पूछें!

​क्या आपने महालया अमावस्या पर अपने पितरों के नाम का धूप-दीप या दान किया है?

​नीचे कमेंट बॉक्स में "जय पितृ देव" जरूर लिखें और अगर आपके मन में पूजा या नियमों से जुड़ा कोई भी सवाल है, तो बेझिझक पूछें। कमलेश जी जल्द से जल्द आपको मार्गदर्शन देंगे।

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